मैरी बेलोक लाउन्ड्स का उपन्यास “गेषुकुनिन” 20वीं सदी के प्रारंभ में लिखा गया था। कहानी बंटिंग दंपति—रॉबर्ट और एलेन—के संघर्षों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो आर्थिक कठिनाइयों में फँस गए हैं और अपने जीवन में कुछ स्थिरता वापस लाने के लिए अपने घर को किराएदारों के लिए बोर्डिंग हाउस में बदलने का प्रयास कर रहे हैं। अपनी अस्थिर परिस्थिति से जूझते हुए उनके यहाँ एक दिलचस्प नया किराएदार आता है, जो उनकी कहानी में एक अप्रत्याशित मोड़ ले आता है। कथा के आरंभ में हम बंटिंग दंपति को दयनीय स्थिति में पाते हैं; वे अपनी आर्थिक दशा और अपने पिछले सम्मानजनक जीवन के खो जाने की चिंता से जूझ रहे हैं। घरेलू नौकरों के रूप में दंपति के अतीत को रेखांकित किया गया है, साथ ही किराएदारों को घर में रखकर फिर से उबरने की उनकी आशा को भी। आरंभिक अध्यायों में उनके आपसी व्यवहार, अपनी दुर्दशा को लेकर उनकी भावनाओं और एक नए संभावित किराएदार—मिस्टर स्लूथ नामक एक विचित्र सज्जन—से उनकी पहली मुलाकात का विवरण है। वह व्यक्ति एक पहेली-सा प्रतीत होता है, फिर भी उनके नीरस अस्तित्व में आशा की एक किरण लेकर आता है। यह क्षण उनके भाग्य में एक निर्णायक परिवर्तन का परिचय देता है, क्योंकि वे अपने घर को मेहमानों के लिए खोलते हैं और निराशा के साथ नए उद्देश्य की संभावना भी उनके जीवन में प्रवेश करती है।
अनुवाद: द लॉजर