अलेक्सांदर सर्गेयेविच पुश्किन द्वारा लिखित “बोरिस गोडूनोव: एक काव्यात्मक नाटक” 19वीं सदी की शुरुआत में लिखा गया एक नाटक है। इस नाटक की कहानी रूस में बोरिस गोडूनोव के उथल-पुथल भरे शासनकाल के दौरान घटती है, एवं इसमें शक्ति, वैधता एवं राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के परिणामों जैसे विषयों पर चर्चा की गई है। मुख्य पात्रों में बोरिस गोडूनोव शामिल हैं; जो एक किसान के बेटे हैं, लेकिन तानाशाही एवं हत्या के आरोपों के बावजूद सिंहासन पर आ जाते हैं। इसके अलावा, ग्रेगरी ओत्रेपिएव नामक एक युवा सन्यासी भी महत्वपूर्ण पात्र है; जो ज़ार के उत्तराधिकार का दावेदार बनकर नाटक के मुख्य संघर्ष का कारण बनता है। “बोरिस गोडूनोव” में रूस में चल रही राजनीतिक साजिशों एवं अशांति का जीवंत चित्रण किया गया है। नाटक की शुरुआत में ही प्रमुख अभिजात लोग बोरिस के सिंहासन पर आने में होने वाली हिचकिचाहट पर चर्चा करते हैं; जबकि शुइस्की एवं वोरोटिन्स्की जैसे पात्र युवा राजकुमार की मौत में बोरिस की संलिप्तता पर संदेह प्रकट करते हैं। लोगों की नेतृत्व की माँग ही बोरिस को अंततः सत्ता स्वीकार करने पर मजबूर करती है… एवं इसी दौरान ग्रेगरी ओत्रेपिएव की महत्वाकांक्षाएँ सिंहासन के लिए एक उथल-पुथल भरा संघर्ष शुरू कर देती हैं… जो पूरे नाटक में अधिकार एवं वैधता के लिए होने वाले संघर्ष की भूमिका निभाती हैं।