अलेक्ज़ांद्र सर्गेयेविच पुश्किन की “कविताएँ” उन्नीसवीं शताब्दी के आरंभ में रची गई काव्य-कृतियों का संग्रह है। इस संकलन में पुश्किन ने आत्मकथात्मक, आख्यानात्मक और गीतात्मक रूपों के माध्यम से प्रेम, प्रकृति और मानवीय अनुभव सहित विभिन्न विषयों का अन्वेषण किया है। यह संग्रह सुंदर ढंग से रचे गए पद्यों में गहन भावनाओं को संजोने और उन्हें सार्वभौमिक संवेदनाओं से जोड़ने की पुश्किन की क्षमता को प्रदर्शित करता है। पुस्तक के आरंभ में ग्रंथसूचीपरक प्रस्तावना और अनुवादक इवान पानिन की भूमिका शामिल है, जो न केवल पुश्किन की कविता प्रस्तुत करती है, बल्कि कवि के कलात्मक आदर्शों और आंतरिक जीवन पर भी चर्चा करती है। पानिन पुश्किन की सृजनशीलता के सार को स्पष्ट करते हुए उसकी सहजता और भावनात्मक गहराई पर बल देते हैं। इस खंड में प्रस्तुत प्रमुख विषयों में आत्मचिंतन, पश्चाताप का बोझ और कलाकार तथा उसकी कला के बीच का गहरा संबंध शामिल हैं; इनका विस्तार “मेरा चित्र”, “मेरा स्मारक” और “मेरी म्यूज़” जैसी विशिष्ट कविताओं के माध्यम से किया गया है। कुल मिलाकर, यह अंश पाठकों को पुश्किन की काव्यात्मक आवाज़ की समृद्धि और जटिलता का रसास्वादन करने के लिए तैयार करता है।