हेनरी बर्गसों की रचना "Time and Free Will: An Essay on the Immediate Data of Consciousness" 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में लिखी गई एक दार्शनिक कृति है। इस निबंध में बर्गसों समय, चेतना और स्वतंत्र इच्छा की प्रकृति का अन्वेषण करते हैं। वे वास्तविक अवधि और गुणात्मक अनुभवों के महत्त्व पर बल देते हुए पारंपरिक नियतिवादी दृष्टिकोणों का खंडन करते हैं। पाठ की शुरुआत बर्गसों द्वारा चेतन अवस्थाओं की तीव्रता के अन्वेषण की भूमिका तैयार करती है और यह प्रश्न उठाती है कि हम भावनाओं तथा संवेदनाओं जैसे गुणों को किस प्रकार अनुभव करते और मापते हैं। वे इस धारणा को चुनौती देते हैं कि इन गुणात्मक अनुभवों को भौतिक परिमाणों की तरह मात्रात्मक रूप में व्यक्त किया जा सकता है। इसके बजाय, वे चेतना को अनुभवों के एक जटिल, परस्पर संबद्ध प्रवाह के रूप में समझने की वकालत करते हैं। संवेदी तीव्रता का यह आलोचनात्मक परीक्षण बर्गसों की चेतना और स्वतंत्र इच्छा के संबंध में की जाने वाली गहनतर पड़ताल की बस शुरुआत है और पाठक को ऐसी दार्शनिक यात्रा के लिए तैयार करता है, जिसमें अनुभवजन्य अवलोकनों का सहज बोध के साथ मेल होता है।
इस पुस्तक के बारे में विकिपीडिया पृष्ठ: en.wikipedia.org/wiki/Time_and_Free_Will