विल्फ्रेड बायरन शॉ द्वारा लिखित “द यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन” 20वीं सदी की शुरुआत में लिखी गई एक ऐतिहासिक पुस्तक है। इस पुस्तक का उद्देश्य, मिशिगन विश्वविद्यालय के विकास, महत्वपूर्ण घटनाओं एवं प्रमुख व्यक्तित्वों का विवरण प्रस्तुत करना है; न कि इसका एक व्यापक ऐतिहासिक विश्लेषण करना। यह पुस्तक मिशिगन विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर उसकी शैक्षणिक यात्रा में हुई प्रमुख उपलब्धियों तक का वर्णन करती है। पुस्तक की शुरुआत 1837 में हुई पहली बोर्ड ऑफ रेजिनेट्स बैठक से होती है, एवं इसमें उस संस्थान के सामने आई चुनौतियों – सीमित संसाधनों से लेकर संस्थापक सदस्यों की महत्वाकांक्षाओं तक – पर भी चर्चा की गई है। पुस्तक में रेजिनेट्स के आदर्शवाद एवं ऐसे सार्वजनिक विश्वविद्यालय की रचना हेतु उनकी दृष्टि को भी वर्णित किया गया है, जो एक बढ़ते हुए राज्य की शैक्षणिक आवश्यकताओं को पूरा कर सके; तथा अमेरिकी उच्च शिक्षा के लिए एक नया मॉडल स्थापित कर सके। इन प्रारंभिक चुनौतियों के बावजूद, मिशिगन विश्वविद्यालय एक सफल संस्थान के रूप में उभरा; एवं इसमें उस समय की अमेरिकी शिक्षा व्यवस्था में विकसित हो रहे आदर्शों की प्रतिबिंब भी दिखाई देती है।