एंटोनिनो एम. द्वारा लिखित “डेर रोमान एस गेबॉर्न फ्रॉ वेनर विक्रीम” एक अर्ध-आत्मकथात्मक उपन्यास है, जो 19वीं सदी के अंत में लिखा गया। इस पुस्तक में मुख्य पात्र एंटोनिनो एम. के जीवन का वर्णन किया गया है; एक ऐसा व्यक्ति जिसका इतिहास हिंसक अपराधों एवं कारावास से भरा हुआ है। इस प्रक्रिया में उसकी पहचान एवं मनोवैज्ञानिक स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा की गई है। व्यक्तिगत अनुभवों एवं मनोवैज्ञानिक विश्लेषणों के माध्यम से लेखक उन प्रेरणाओं एवं परिस्थितियों का अध्ययन करते हैं जिनके कारण कोई व्यक्ति अपराध की दुनिया में धस जाता है। पुस्तक की शुरुआत में एंटोनिनो एम. को एक दोषी अपराधी के रूप में प्रस्तुत किया गया है; वह वर्तमान में इटली की एक जेल में सजा काट रहा है। कहानी में उसके अतीत, उसके उतार-चढ़ावपूर्ण पालन-पोषण, अपराध की दुनिया में उसके प्रवेश, एवं जेल प्रणाली के भीतर उसके संपर्कों का वर्णन है। इसमें “नियति”, “सामाजिक परिवेश” एवं “मनोवैज्ञानिक संघर्ष” जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई है; ये सभी कारक उसकी पहचान को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पुस्तक में उसकी हिंसक प्रवृत्तियों पर काबू पाने के असफल प्रयासों, एवं अंततः अपना भविष्य स्वयं तय करने की कोशिशों पर भी विस्तार से चर्चा की गई है।