जॉन पी. जोन्स द्वारा लिखित "इंडिया, इट्स लाइफ़ एंड थॉट" 20वीं सदी के आरंभ में लिखा गया एक सामाजिक-सांस्कृतिक अध्ययन है। इस कृति का उद्देश्य भारतीय जीवन, संस्कृति और उपमहाद्वीप में सह-अस्तित्व रखने वाली विभिन्न विश्वास-प्रणालियों की जटिलताओं को स्पष्ट करना है। भारत में अपने व्यापक अनुभव के आधार पर लेखक पश्चिमी लोगों और भारतीय जनता के बीच गहरे अलगाव तथा गलतफहमी की पड़ताल करते हैं और समझ तथा साझा ज्ञान के माध्यम से इस खाई को पाटने का प्रयास करते हैं। पुस्तक का आरंभ भारत में व्याप्त अशांति के विषय से होता है, जो देश को निष्क्रिय और गतिहीन मानने की पारंपरिक धारणा को चुनौती देता है। जोन्स संकेत देते हैं कि भारत एक महत्वपूर्ण जागरण से गुजर रहा है, जिसे पश्चिमी शिक्षा, राजनीतिक आंदोलनों और रूस पर जापान की विजय जैसी ऐतिहासिक घटनाओं के प्रभाव सहित अनेक कारकों ने प्रेरित किया है। वे ब्रिटिश शासन के अधीन अपनी अधीनस्थ स्थिति के प्रत्युत्तर में शिक्षित वर्गों में पनप रहे असंतोष को रेखांकित करते हैं और इस संक्रमण के बीच उभर रहे नस्ली तनावों तथा वैचारिक संघर्षों का विश्लेषण करते हैं। इस विश्लेषण के माध्यम से वे उस समय भारत की सामाजिक और राजनीतिक वास्तविकताओं की गहन पड़ताल की पृष्ठभूमि तैयार करते हैं और संकेत देते हैं कि यह अशांति व्यापक वैश्विक परिवर्तनों का लक्षण होने के साथ-साथ आत्मनिर्णय की दिशा में एक आंतरिक जागरण भी है।