ई. फ़िलिप्स ओपेनहाइम का उपन्यास "अदला-बदला हुआ आदमी" 20वीं सदी के आरंभ में लिखा गया था। कहानी एवेरार्ड डोमिनी से शुरू होती है, जो एक थका हुआ ब्रिटिश व्यक्ति है और पूर्वी अफ्रीका में एक खतरनाक साहसिक घटना के बाद स्वास्थ्य लाभ कर रहा है; वहाँ वह खो गया था और इंग्लैंड में अपने जीवन से उसका संबंध टूट गया था। उपन्यास में पहचान और अतीत के कार्यों के परिणाम जैसे विषय उभरते हैं, जब डोमिनी का सामना ऐसे व्यक्ति से होता है जो उससे आश्चर्यजनक रूप से मिलता-जुलता है और उनके जीवन के भाग्य तथा द्वैत को लेकर सवाल खड़े करता है। उपन्यास का आरंभ हमें एवेरार्ड डोमिनी से परिचित कराता है, जो एक दुरूह यात्रा के बाद सुदूर अफ्रीकी शिविर में भ्रमित अवस्था में जागता है। वह स्वयं को एक डॉक्टर और बैरन लियोपोल्ड फ़ॉन रागस्टाइन नामक एक रहस्यमय यूरोपीय व्यक्ति की देखभाल में पाता है, जो आश्चर्यजनक रूप से बिल्कुल उसी जैसा दिखता है। बातचीत के दौरान डोमिनी को पता चलता है कि बैरन का इंग्लैंड में डोमिनी के जीवन से संबंधित कोई गुप्त उद्देश्य है, जिससे छल और पहचान की अदला-बदली से जुड़ी एक रोचक कथावस्तु का संकेत मिलता है। इस प्रकार एक ऐसी जटिल कथा की पृष्ठभूमि तैयार होती है, जिसमें अतीत की त्रासदियाँ, व्यक्तिगत रूपांतरण और इन दोनों पुरुषों के परस्पर जुड़े भाग्य शामिल हैं।
का अनुवाद: द ग्रेट इम्पर्सनेशन