अनाटोल फ्रांसे द्वारा लिखित “ल’इल डेस पिंगुइन्स” एक ऐतिहासिक उपन्यास है, जो 1908 में प्रकाशित हुआ। जब एक दृष्टिहीन संत गलती से मनुष्यों के बजाय पिंगुइनों का बपतिस्मा दे देता है, तो भगवान उन्हें मनुष्यों में बदल देते हैं… इस प्रकार एक नई सभ्यता की उत्पत्ति हो जाती है। फ्रांसे इन पिंगुइनों/मनुष्यों के संपूर्ण इतिहास का वर्णन, प्राचीन काल से लेकर भविष्य तक, करते हैं… एवं ऐसा करके फ्रांसीसी इतिहास का ही व्यंग्यात्मक प्रतिबिंब प्रस्तुत करते हैं। इस कहानी में “ड्रेफस मामला” का व्यंग्यपूर्ण चित्रण है… साथ ही धार्मिक ढोंग, राजनीतिक भ्रष्टाचार एवं सामाजिक अर्थहीनताओं पर भी तीखा आलोचनात्मक उल्लेख है। यह काल्पनिक कहानी मानव सभ्यता को “महत्वाकांक्षा, विनाश एवं पतन” के एक अनंत चक्र के रूप में प्रस्तुत करती है।
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