二葉亭四迷 की "血笑記" संभवतः उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में लिखा गया एक उपन्यास है। यह कहानी सैनिकों के भयावह अनुभवों में उतरती है और भय, पागलपन तथा युद्ध की निरर्थकता जैसे विषयों को छूती है। इसमें युद्ध की अराजकता और पागलपन के कगार पर डगमगाती दुनिया के बीच नायक के संघर्षों को उकेरा गया है। उपन्यास का आरंभ एक कठोर और दमनकारी भू-दृश्य से होकर सैनिक की अथक पदयात्रा का सजीव चित्रण प्रस्तुत करता है, जहाँ प्रचंड गर्मी और शत्रु के पीछा करने का मंडराता खतरा है। नायक थकान, भ्रम और भय से उत्पन्न विचलित कर देने वाली अनुभूतियों का वर्णन करता है, जबकि उसके आसपास साथी सैनिक गिरते जाते हैं; इससे युद्ध के मनोवैज्ञानिक प्रभाव स्पष्ट होते हैं। अमूर्त और अतियथार्थवादी बिंबों के माध्यम से यह पाठ आसन्न विनाश की भावना जगाता है और विवेक तथा पागलपन के बीच की महीन रेखा का अन्वेषण करता है, जिससे व्यापक कथा में संघर्ष के परिणामों की गहन पड़ताल की भूमिका तैयार होती है।
का अनुवाद: द रेड लाफ