इमैनुएल कांत द्वारा लिखित “प्योर रीजन की आलोचना” एक दार्शनिक ग्रंथ है, जो 1781 में प्रकाशित हुआ। कांत ने विमर्शशास्त्र की सीमाओं एवं दायरे पर विचार-विमर्श किया, एवं यह पूछा कि हम किसी चीज़ को अनुभव करने से पहले ही कैसे उसके बारे में जान सकते हैं। उन्होंने तर्कवादी एवं अनुभववादी परंपराओं दोनों को चुनौती दी, एवं स्थान, समय एवं ज्ञान से संबंधित कई क्रांतिकारी विचार प्रस्तुत किए। इस ग्रंथ को चालने वाला मुख्य प्रश्न यह है: “संश्लेषित, पूर्व-निर्धारित निर्णय कैसे संभव हैं?” कांत का मानना है कि यह मुद्दा मानव तर्क की अस्तित्व-रक्षा हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस पुस्तक के बारे में विकिपीडिया पृष्ठ: en.wikipedia.org/wiki/Critique_of_Pure_Reason