एस. खुदा बख्श की पुस्तक "द इस्लाम ऑफ मोहम्मद" इस्लाम की नींव और पैगंबर मोहम्मद की शिक्षाओं का विद्वत्तापूर्ण विवेचन है, जिसे 20वीं शताब्दी के आरंभ में लिखा गया था। इस कृति का उद्देश्य इस्लाम के उस मूल स्वरूप का अन्वेषण करना है, जिस रूप में उसका प्रारंभिक उपदेश दिया गया था और जो बाद के धर्मशास्त्रीय विवादों तथा सांस्कृतिक सम्मिश्रणों से मुक्त था। इसमें इस्लाम-पूर्व अरब के सामाजिक-धार्मिक संदर्भ और मोहम्मद द्वारा प्रतिपादित उन नवीन शिक्षाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिन्होंने अरब लोगों के जीवन को रूपांतरित कर दिया। इस पाठ में बख्श इस्लाम के आगमन से पहले अरब की परिस्थितियों का सूक्ष्मता से वर्णन करते हैं और उस समाज में व्याप्त जनजातिवाद, मूर्तिपूजक मान्यताओं तथा नैतिक शून्यता को रेखांकित करते हैं। वे अरब की विचारधारा पर यहूदी धर्म और ईसाई धर्म के प्रभावों का अनुशीलन करते हैं, साथ ही उन इस्लाम-पूर्व प्रथाओं के अवशेषों को भी स्वीकार करते हैं जिन्हें इस्लामी अनुष्ठानों में समाहित कर लिया गया था। बख्श के अनुसार, इस्लाम की शिक्षाओं के केंद्र में ईश्वर की पूर्ण एकता (एकेश्वरवाद) की अवधारणा, दूसरों के प्रति नैतिक उत्तरदायित्वों की स्थापना और जनजातीय संबद्धताओं से कहीं आगे बढ़कर सामुदायिक एकजुटता की आवश्यकता है। लेखक बताते हैं कि इस्लाम ने प्रार्थना, ज़कात, रोज़ा और हज जैसे अपने मूल सिद्धांतों के माध्यम से भाईचारे और नैतिक अनुशासन की भावना को बढ़ावा दिया, जिसने अरब समाज को नया रूप दिया और उसके उल्लेखनीय विस्तार की नींव रखी।