टी. आर. मैल्थस द्वारा लिखित “अन एस्से ऑन द प्रिंसिपल ऑफ पॉपुलेशन” नामक पुस्तक पहली बार 1798 में गुमनाम रूप से प्रकाशित हुई। इस पुस्तक में चेतावनी दी गई है कि जबकि जनसंख्या घातांकीय रूप से बढ़ती है, तो खाद्य उत्पादन अंकगणितीय दर से ही बढ़ता है; इस कारण जन्म दर में कमी नहीं आई तो अनिवार्य रूप से अकाल पड़ जाएगा। मैल्थस का तर्क है कि जनसंख्या वृद्धि मानवता के कुछ वर्गों को गरीबी में धकेल देती है, क्योंकि समृद्ध अवधियों में समाज इतना विस्तारित हो जाता है कि संसाधन पर्याप्त नहीं रह जाते। इस पुस्तक का प्रभाव जनगणना आंदोलन एवं डार्विन के प्राकृतिक चयन सिद्धांत दोनों पर पड़ा।