Divine Comedy, Longfellow's Translation, Hell

Dante Alighieri, 1265-1321

इस किताब के बारे में

डांते अलीगिएरी द्वारा रचित “डिवाइन कॉमेडी – लॉंगफेलो का अनुवाद, नरक” एक 14वीं शताब्दी में रचित महाकाव्य है। यह एक जटिल, रहस्यमय कथा है जो पाप, मुक्ति एवं आत्मा की दिव्य न्याय की खोज जैसे विषयों पर चर्चा करती है। मुख्य पात्र डांते स्वयं रोमन कवि वर्जिल के मार्गदर्शन में नरक की यात्रा पर निकल पड़ते हैं। इस कहानी की शुरुआत में डांते एक अंधेरे जंगल में खो जाते हैं; यह उनकी भ्रमितता एवं अपने पापों को स्वीकार करने की प्रक्रिया का प्रतीक है। जब वे मुक्ति का प्रतीक माने जाने वाले पहाड़ पर चढ़ने का प्रयास करते हैं, तो उनके सामने तीन जंगली जानवर आ जाते हैं; प्रत्येक जानवर किसी न किसी दुष्ट व्यवहार का प्रतीक है। निराशा में, डांते को वर्जिल मिलते हैं, जो उन्हें नरक से होते हुए स्वर्ग तक पहुँचाने का वादा करते हैं… एवं यह सब डांते की प्रियतमा बेयाट्रिस की प्रार्थना के कारण होता है। इस कहानी की शुरुआत ही चिंतन एवं भय का माहौल पैदा करती है; साथ ही डांते की ज्ञान प्राप्त करने एवं मुक्ति पाने की इच्छा को भी दर्शाती है… जिससे यह कहानी नैतिकता एवं मृत्युपरांत जीवन पर उनके गहन अन्वेषण की शुरुआत हो जाती है।

लेखक
Dante Alighieri, 1265-1321
पढ़ने का स्तर
B1 · मध्यम
भाषा
English