क्रिश्चियन मॉर्गेनश्टर्न का “गाल्गेनलीडर नेब्स्ट डेम ‘गिंगगांज़’” काव्य-संग्रह पहली बार मार्च 1905 में प्रकाशित हुआ था। ये चंचल, प्रयोगधर्मी कविताएँ पॉट्सडाम के निकट सैर के दौरान स्वयं को “गाल्गेनब्रूडर” कहने वाले आठ मित्रों के बीच निजी प्रस्तुतियों के रूप में शुरू हुई थीं। मॉर्गेनश्टर्न ऐसे कल्पनाशील भाषा-खेल और विचित्र पद्य रचते हैं जो बालसुलभ प्रतीत होते हैं, किंतु उनमें गहरे अर्थ निहित हैं। ये कविताएँ भाषिक सीमाओं को आगे बढ़ाती हैं—एक कविता पूरी तरह छंद-संबंधी प्रतीकों से बनी है, जबकि दूसरी बाड़ की पट्टियों के बीच की जगह से वास्तुकला निर्मित करती है। मूलतः प्रकाशन के लिए कभी अभिप्रेत न किए गए ये रचनाएँ मॉर्गेनश्टर्न की साहित्यिक प्रतिष्ठा की आधारशिला बनीं और आज भी वैज्ञानिक चुटकुलों तथा संगीत रूपांतरणों को प्रेरित करती हैं।
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