जॉर्ज ब्रांदेस द्वारा लिखित “वोल्तेयर” 19वीं सदी के उत्तरार्ध में लिखा गया एक ऐतिहासिक वृत्तांत है। यह कृति फ्रांसीसी प्रबोधनकालीन लेखक और दार्शनिक वोल्तेयर के जीवन तथा प्रभाव का अन्वेषण करती है और उनके समय के साहित्य, संस्कृति और समाज में उनके महत्व की पड़ताल करती है। इसमें वोल्तेयर के योगदान, सत्ता के साथ उनके संघर्षों और उनकी साहित्यिक प्रतिभा को रेखांकित करते हुए उन्हें 18वीं सदी के विचार-जगत की एक प्रमुख हस्ती के रूप में प्रस्तुत किया गया है। कृति का आरंभ साहित्यिक कैनन में वोल्तेयर के विशिष्ट स्थान पर बल देता है और संकेत करता है कि वे उन विरले लेखकों में शामिल हैं जिन्होंने राष्ट्रीय सीमाओं का अतिक्रमण कर विश्व इतिहास को प्रभावित किया। इसमें वोल्तेयर को प्रतिभा और ऊर्जा से भरपूर व्यक्तित्व के रूप में चित्रित किया गया है तथा सिसरो जैसे ऐतिहासिक महापुरुषों से उनकी तुलना की गई है, साथ ही उनके जीवनकाल में उठे विवादों को भी स्वीकार किया गया है। यह पाठ वोल्तेयर की विरासत की एक आरंभिक समझ प्रस्तुत करता है—ऐसी विरासत के रूप में जो केवल एक व्यक्तिगत यात्रा का प्रतिनिधित्व नहीं करती, बल्कि एक ऐसे सांस्कृतिक मील के पत्थर का भी प्रतिनिधित्व करती है जिसने आधुनिक विचार की नींव रखी और दमनकारी सामाजिक व्यवस्था के बीच तर्क तथा मानवाधिकारों की वकालत की।